Saturday, September 8, 2012

समय


"समय की बलिहारी"

समय अति बलवान है, उसके अनेक रूप
ब्रह्मा-विष्णु-महेश हैं, समय के तीन स्वरुप


ब्रह्मा जी हैं भूतकाल, उनकी पूजा न होए
बीत गया सो बीत गया, क्यों पछताए कोए
पर वह हैं हमारा मूल बीज, उत्पत्ति का स्थान
आत्मज्ञान की कुंजी से, ब्रह्म को लो पहचान

महेश भविष्य के हैं कर्ता, जीवन के आधार
काल ग्रास कर अमृत दें, हैं कृपालु अपरम्पार
सुख-शान्ति परमानन्द, जो हो भविष्य की चाह
महेशसम् जो ध्यानरत, पावें तृप्ति की राह

अग्रसर जो नर, मोक्ष मार्ग पर
वर्तमान को, जप-तप से सिंचित कर
वही वर्तमान क्षण, विष्णु का आसन
मनुष्य जीवन का, है श्रेष्ठतम धन
सुमिरन-भजन की राह पर, रख वर्तमान की धार
हरिनाम से रसबोर होवो, वही लगायें पार

समय को जानो, समय पहचानों, समय की महिमा भारी
समय-समय पर समय को साधो, है समय की बलिहारी

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